श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.38.36

दशम स्कन्ध · अध्याय 38 · अथाष्टात्रिंशोऽध्यायः

भगवांस्तमभिप्रेत्य रथांगाङ्कितपाणिना।

परिरेभेऽभ्युपाकृष्य प्रीतः प्रणतवत्सलः॥ ३६

bhagavāṃstamabhipretya rathāṃgāṅkitapāṇinā|

parirebhe'bhyupākṛṣya prītaḥ praṇatavatsalaḥ|| 36

अर्थ

शरणागतवत्सल भगवान् श्रीकृष्ण उनके मनका भाव जान गये। उन्होंने बड़ी प्रसन्‍नतासे चक्रांकित हाथोंके द्वारा उन्हें खींचकर उठाया और हृदयसे लगा लिया॥ ३६॥

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