परीक्षित्! भगवान्के दर्शनसे उन्हें इतना आह्लाद हुआ कि उनके नेत्र आँसूसे सर्वथा भर गये। सारे शरीरमें पुलकावली छा गयी। उत्कण्ठावश गला भर आनेके कारण वे अपना नाम भी न बतला सके॥ ३५॥
भगवद्दर्शनाह्लादबाष्पपर्याकुलेक्षणः ।
पुलकाचितांग औत्कण्ठ्यात् स्वाख्याने नाशकन् नृप॥ ३५
परीक्षित्! भगवान्के दर्शनसे उन्हें इतना आह्लाद हुआ कि उनके नेत्र आँसूसे सर्वथा भर गये। सारे शरीरमें पुलकावली छा गयी। उत्कण्ठावश गला भर आनेके कारण वे अपना नाम भी न बतला सके॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.38.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 372) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/38/35/