श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.39.11

दशम स्कन्ध · अध्याय 39 · अथैकोनचत्वारिंशोऽध्यायः

गोपान् समादिशत् सोऽपि गृह्यतां सर्वगोरसः।

उपायनानि गृह्णीध्वं युज्यन्तां शकटानि च॥ ११

gopān samādiśat so'pi gṛhyatāṃ sarvagorasaḥ|

upāyanāni gṛhṇīdhvaṃ yujyantāṃ śakaṭāni ca|| 11

अर्थ

तब नन्दबाबाने सब गोपोंको आज्ञा दी कि ‘सारा गोरस एकत्र करो। भेंटकी सामग्री ले लो और छकड़े जोड़ो॥ ११॥

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