श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.39.12

दशम स्कन्ध · अध्याय 39 · अथैकोनचत्वारिंशोऽध्यायः

यास्यामः श्‍वो मधुपुरीं दास्यामो नृपते रसान्।

द्रक्ष्यामः सुमहत् पर्व यान्ति जानपदाः किल।

एवमाघोषयत् क्षत्त्रा नन्दगोपः स्वगोकुले॥ १२

yāsyāmaḥ śvo madhupurīṃ dāsyāmo nṛpate rasān|

drakṣyāmaḥ sumahat parva yānti jānapadāḥ kila|

evamāghoṣayat kṣattrā nandagopaḥ svagokule|| 12

अर्थ

कल प्रातःकाल ही हम सब मथुराकी यात्रा करेंगे और वहाँ चलकर राजा कंसको गोरस देंगे। वहाँ एक बहुत बड़ा उत्सव हो रहा है। उसे देखनेके लिये देशकी सारी प्रजा इकट्ठी हो रही है। हमलोग भी उसे देखेंगे।’ नन्दबाबाने गाँवके कोतवालके द्वारा यह घोषणा सारे व्रजमें करवा दी॥ १२॥

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