श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.4.13

दशम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

इति प्रभाष्य तं देवी माया भगवती भुवि।

बहुनामनिकेतेषु बहुनामा बभूव ह॥ १३

iti prabhāṣya taṃ devī māyā bhagavatī bhuvi|

bahunāmaniketeṣu bahunāmā babhūva ha|| 13

अर्थ

कंससे इस प्रकार कहकर भगवती योगमाया वहाँसे अन्तर्धान हो गयीं और पृथ्वीके अनेक स्थानोंमें विभिन्‍न नामोंसे प्रसिद्ध हुईं॥ १३॥

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