देवीकी यह बात सुनकर कंसको असीम आश्चर्य हुआ। उसने उसी समय देवकी और वसुदेवको कैदसे छोड़ दिया और बड़ी नम्रतासे उनसे कहा—॥ १४॥
तयाभिहितमाकर्ण्य कंसः परमविस्मितः।
देवकीं वसुदेवं च विमुच्य प्रश्रितोऽब्रवीत्॥ १४
देवीकी यह बात सुनकर कंसको असीम आश्चर्य हुआ। उसने उसी समय देवकी और वसुदेवको कैदसे छोड़ दिया और बड़ी नम्रतासे उनसे कहा—॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.4.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 146) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/4/14/