‘मेरी प्यारी बहिन और बहनोईजी! हाय-हाय, मैं बड़ा पापी हूँ । राक्षस जैसे अपने ही बच्चोंको मार डालता है, वैसे ही मैंने तुम्हारे बहुत-से लड़के मार डाले। इस बातका मुझे बड़ा खेद है*॥ १५॥
अहो भगिन्यहो भाम मया वां बत पाप्मना।
पुरुषाद इवापत्यं बहवो हिंसिताः सुताः॥ १५
‘मेरी प्यारी बहिन और बहनोईजी! हाय-हाय, मैं बड़ा पापी हूँ । राक्षस जैसे अपने ही बच्चोंको मार डालता है, वैसे ही मैंने तुम्हारे बहुत-से लड़के मार डाले। इस बातका मुझे बड़ा खेद है॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.4.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 147) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/4/15/
टिप्पणियाँ
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जिनके गर्भमें भगवान्ने निवास किया, जिन्हें भगवान्के दर्शन हुए, उन देवकी-वसुदेवके दर्शनका ही यह फल है कि कंसके हृदयमें विनय, विचार, उदारता आदि सद्गुणोंका उदय हो गया। परन्तु जबतक वह उनके सामने रहा तभीतक ये सद्गुण रहे। दुष्ट मन्त्रियोंके बीचमें जाते ही वह फिर ज्यों-का-त्यों हो गया!