श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.4.30

दशम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

आकर्ण्य भर्तुर्गदितं तमूचुर्देवशत्रवः।

देवान् प्रति कृतामर्षा दैतेया नातिकोविदाः॥ ३०

ākarṇya bharturgaditaṃ tamūcurdevaśatravaḥ|

devān prati kṛtāmarṣā daiteyā nātikovidāḥ|| 30

अर्थ

कंसके मन्त्री पूर्णतया नीतिनिपुण नहीं थे। दैत्य होनेके कारण स्वभावसे ही वे देवताओंके प्रति शत्रुताका भाव रखते थे। अपने स्वामी कंसकी बात सुनकर वे देवताओंपर और भी चिढ़ गये और कंससे कहने लगे—॥ ३०॥

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