श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.4.35

दशम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

न त्वं विस्मृतशस्त्रास्त्रान् विरथान् भयसंवृतान्।

हंस्यन्यासक्तविमुखान् भ‌ग्‍नचापानयुध्यतः॥ ३५

na tvaṃ vismṛtaśastrāstrān virathān bhayasaṃvṛtān|

haṃsyanyāsaktavimukhān bhagnacāpānayudhyataḥ|| 35

अर्थ

आप उन शत्रुओंको नहीं मारते जो अस्त्र-शस्त्र भूल गये हों, जिनका रथ टूट गया हो, जो डर गये हों, जो लोग युद्ध छोड़कर अन्यमनस्क हो गये हों, जिनका धनुष टूट गया हो या जिन्होंने युद्धसे अपना मुख मोड़ लिया हो—उन्हें भी आप नहीं मारते॥ ३५॥

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