श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.4.36

दशम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

किं क्षेमशूरैर्विबुधैरसंयुगविकत्थनैः।

रहोजुषा किं हरिणा शम्भुना वा वनौकसा।

किमिन्द्रेणाल्पवीर्येण ब्रह्मणा वा तपस्यता॥ ३६

kiṃ kṣemaśūrairvibudhairasaṃyugavikatthanaiḥ|

rahojuṣā kiṃ hariṇā śambhunā vā vanaukasā|

kimindreṇālpavīryeṇa brahmaṇā vā tapasyatā|| 36

अर्थ

देवता तो बस वहीं वीर बनते हैं, जहाँ कोई लड़ाई-झगड़ा न हो। रणभूमिके बाहर वे बड़ी-बड़ी डींग हाँकते हैं। उनसे तथा एकान्तवासी विष्णु, वनवासी शंकर, अल्पवीर्य इन्द्र और तपस्वी ब्रह्मासे भी हमें क्या भय हो सकता है॥ ३६॥

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