भगवान् श्रीकृष्णने उनसे पूछा—‘चाचाजी! आपने पृथ्वी, आकाश या जलमें कोई अद्भुत वस्तु देखी है क्या? क्योंकि आपकी आकृति देखनेसे ऐसा ही जान पड़ता है’॥ ३॥
तमपृच्छद्धृषीकेशः किं ते दृष्टमिवाद्भुतम्।
भूमौ वियति तोये वा तथा त्वां लक्षयामहे॥ ३
भगवान् श्रीकृष्णने उनसे पूछा—‘चाचाजी! आपने पृथ्वी, आकाश या जलमें कोई अद्भुत वस्तु देखी है क्या? क्योंकि आपकी आकृति देखनेसे ऐसा ही जान पड़ता है’॥ ३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.41.3 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 386) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/41/3/