श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.41.6

दशम स्कन्ध · अध्याय 41 · अथैकचत्वारिंशोऽध्यायः

इत्युक्त्वा चोदयामास स्यन्दनं गान्दिनीसुतः।

मथुरामनयद् रामं कृष्णं चैव दिनात्यये॥ ६ ✎ 971

ityuktvā codayāmāsa syandanaṃ gāndinīsutaḥ|

mathurāmanayad rāmaṃ kṛṣṇaṃ caiva dinātyaye|| 6

अर्थ

गान्दिनीनन्दन अक्रूरजीने यह कहकर रथ हाँक दिया और भगवान् श्रीकृष्ण तथा बलरामजीको लेकर दिन ढलते-ढलते वे मथुरापुरी जा पहुँचे॥ ६॥✎ 1672

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #971 शब्दोंके बीचका स्थान: दिनात्यये॥६ → दिनात्यये॥ ६
  • #1672 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: गान्दिनी-नन्दन → गान्दिनीनन्दन

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