इसके बाद भगवान् श्रीकृष्ण पुरवासियोंसे धनुष-यज्ञका स्थान पूछते हुए रंगशालामें पहुँचे और वहाँ उन्होंने इन्द्रधनुषके समान एक अद्भुत धनुष देखा॥ १५॥
ततः पौरान् पृच्छमानो धनुषः स्थानमच्युतः।
तस्मिन् प्रविष्टो ददृशे धनुरैन्द्रमिवाद्भुतम्॥ १५
इसके बाद भगवान् श्रीकृष्ण पुरवासियोंसे धनुष-यज्ञका स्थान पूछते हुए रंगशालामें पहुँचे और वहाँ उन्होंने इन्द्रधनुषके समान एक अद्भुत धनुष देखा॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.42.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 394) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/42/15/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)