उनका दुष्ट अभिप्राय जानकर बलरामजी और श्रीकृष्ण भी तनिक क्रोधित हो गये और उस धनुषके टुकड़ोंको उठाकर उन्हींसे उनका काम तमाम कर दिया॥ २०॥
अथ तान् दुरभिप्रायान् विलोक्य बलकेशवौ।
क्रुद्धौ धन्वन आदाय शकले तांश्च जघ्नतुः॥ २०
उनका दुष्ट अभिप्राय जानकर बलरामजी और श्रीकृष्ण भी तनिक क्रोधित हो गये और उस धनुषके टुकड़ोंको उठाकर उन्हींसे उनका काम तमाम कर दिया॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.42.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 395) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/42/20/