श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.42.7

दशम स्कन्ध · अध्याय 42 · अथ द्विचत्वारिंशोऽध्यायः

पद‍्भ्यामाक्रम्य प्रपदे द‍्व्यंगुल्युत्तानपाणिना।

प्रगृह्य चुबुकेऽध्यात्ममुदनीनमदच्युतः॥ ७

padbhyāmākramya prapade dvyaṃgulyuttānapāṇinā|

pragṛhya cubuke'dhyātmamudanīnamadacyutaḥ|| 7

अर्थ

भगवान्‌ने अपने चरणोंसे कुब्जाके पैरके दोनों पंजे दबा लिये और हाथ ऊँचा करके दो अँगुलियाँ उसकी ठोड़ीमें लगायीं तथा उसके शरीरको तनिक उचका दिया॥ ७॥

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