भगवान् श्रीकृष्ण उस कुब्जापर बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने अपने दर्शनका प्रत्यक्ष फल दिखलानेके लिये तीन जगहसे टेढ़ी किन्तु सुन्दर मुखवाली कुब्जाको सीधी करनेका विचार किया॥ ६॥
प्रसन्नो भगवान् कुब्जां त्रिवक्रां रुचिराननाम्।
ऋज्वीं कर्तुं मनश्चक्रे दर्शयन् दर्शने फलम्॥ ६
भगवान् श्रीकृष्ण उस कुब्जापर बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने अपने दर्शनका प्रत्यक्ष फल दिखलानेके लिये तीन जगहसे टेढ़ी किन्तु सुन्दर मुखवाली कुब्जाको सीधी करनेका विचार किया॥ ६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.42.6 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 393) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/42/6/