श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.43.31

दशम स्कन्ध · अध्याय 43 · अथ त्रिचत्वारिंशोऽध्यायः

जनेष्वेवं ब्रुवाणेषु तूर्येषु निनदत्सु च।

कृष्णरामौ समाभाष्य चाणूरो वाक्यमब्रवीत्॥ ३१

janeṣvevaṃ bruvāṇeṣu tūryeṣu ninadatsu ca|

kṛṣṇarāmau samābhāṣya cāṇūro vākyamabravīt|| 31

अर्थ

जिस समय दर्शकोंमें यह चर्चा हो रही थी और अखाड़ेमें तुरही आदि बाजे बज रहे थे, उस समय चाणूरने भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामको सम्बोधन करके यह बात कही—॥ ३१॥

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