श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.43.38

दशम स्कन्ध · अध्याय 43 · अथ त्रिचत्वारिंशोऽध्यायः

बाला वयं तुल्यबलैः क्रीडिष्यामो यथोचितम्।

भवेन्‍नियुद्धं माधर्मः स्पृशेन्मल्ल सभासदः॥ ३८

bālā vayaṃ tulyabalaiḥ krīḍiṣyāmo yathocitam|

bhavenniyuddhaṃ mādharmaḥ spṛśenmalla sabhāsadaḥ|| 38

अर्थ

किन्तु चाणूर! हमलोग अभी बालक हैं। इसलिये हम अपने समान बलवाले बालकोंके साथ ही कुश्ती लड़नेका खेल करेंगे। कुश्ती समान बलवालोंके साथ ही होनी चाहिये, जिससे देखनेवाले सभासदोंको अन्यायके समर्थक होनेका पाप न लगे’॥ ३८॥

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