श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.43.39

दशम स्कन्ध · अध्याय 43 · अथ त्रिचत्वारिंशोऽध्यायः

चाणूर उवाच

न बालो न किशोरस्त्वं बलश्‍च बलिनां वरः।

लीलयेभो हतो येन सहस्रद्विपसत्त्वभृत्॥ ३९

na bālo na kiśorastvaṃ balaśca balināṃ varaḥ|

līlayebho hato yena sahasradvipasattvabhṛt|| 39

अर्थ

चाणूरने कहा—अजी! तुम और बलराम न बालक हो और न तो किशोर। तुम दोनों बलवानोंमें श्रेष्ठ हो, तुमने अभी-अभी हजार हाथियोंका बल रखनेवाले कुवलयापीडको खेल-ही-खेलमें मार डाला॥ ३९॥

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