यमराजने ‘जो आज्ञा’ कहकर भगवान्का आदेश स्वीकार किया और उनका गुरुपुत्र ला दिया। तब यदुवंशशिरोमणि भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजी उस बालकको लेकर उज्जैन लौट आये और उसे अपने गुरुदेवको सौंपकर कहा कि ‘आप और जो कुछ चाहें, माँग लें’॥ ४६॥
तथेति तेनोपानीतं गुरुपुत्रं यदूत्तमौ।
दत्त्वा स्वगुरवे भूयो वृणीष्वेति तमूचतुः॥ ४६
यमराजने ‘जो आज्ञा’ कहकर भगवान्का आदेश स्वीकार किया और उनका गुरुपुत्र ला दिया। तब यदुवंशशिरोमणि भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजी उस बालकको लेकर उज्जैन लौट आये और उसे अपने गुरुदेवको सौंपकर कहा कि ‘आप और जो कुछ चाहें, माँग लें’॥ ४६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.45.46 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 413) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/45/46/