श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.46.19

दशम स्कन्ध · अध्याय 46 · अथ षट्चत्वारिंशोऽध्यायः

अप्यायास्यति गोविन्दः स्वजनान् सकृदीक्षितुम्।

तर्हि द्रक्ष्याम तद्वक्त्रं सुनसं सुस्मितेक्षणम्॥ १९

apyāyāsyati govindaḥ svajanān sakṛdīkṣitum|

tarhi drakṣyāma tadvaktraṃ sunasaṃ susmitekṣaṇam|| 19

अर्थ

आप यह तो बतलाइये कि हमारे गोविन्द अपने सुहृद्-बान्धवोंको देखनेके लिये एक बार भी यहाँ आयेंगे क्या? यदि वे यहाँ आ जाते तो हम उनकी वह सुघड़ नासिका, उनका मधुर हास्य और मनोहर चितवनसे युक्त मुखकमल देख तो लेते॥ १९॥

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