श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.46.20

दशम स्कन्ध · अध्याय 46 · अथ षट्चत्वारिंशोऽध्यायः

दावा‌ग्‍नेर्वातवर्षाच्च वृषसर्पाच्च रक्षिताः।

दुरत्ययेभ्यो मृत्युभ्यः कृष्णेन सुमहात्मना॥ २०

dāvāgnervātavarṣācca vṛṣasarpācca rakṣitāḥ|

duratyayebhyo mṛtyubhyaḥ kṛṣṇena sumahātmanā|| 20

अर्थ

उद्धवजी! श्रीकृष्णका हृदय उदार है, उनकी शक्ति अनन्त है, उन्होंने दावानलसे, आँधी-पानीसे, वृषासुर और अजगर आदि अनेकों मृत्युके निमित्तोंसे—जिन्हें टालनेका कोई उपाय न था—एक बार नहीं, अनेक बार हमारी रक्षा की है॥ २०॥

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