श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.47.68

दशम स्कन्ध · अध्याय 47 · अथ सप्तचत्वारिंशोऽध्यायः

एवं सभाजितो गोपैः कृष्णभक्त्या नराधिप।

उद्धवः पुनरागच्छन्मथुरां कृष्णपालिताम्॥ ६८

evaṃ sabhājito gopaiḥ kṛṣṇabhaktyā narādhipa|

uddhavaḥ punarāgacchanmathurāṃ kṛṣṇapālitām|| 68

अर्थ

प्रिय परीक्षित्! नन्दबाबा आदि गोपोंने इस प्रकार श्रीकृष्ण-भक्तिके द्वारा उद्धवजीका सम्मान किया। अब वे भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा सुरक्षित मथुरापुरीमें लौट आये॥ ६८॥✎ 1678 1986

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1678 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: आज्ञा-पालन → आज्ञापालन
  • #1986 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): उन्हींकी → उन्हींके

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