प्रिय परीक्षित्! नन्दबाबा आदि गोपोंने इस प्रकार श्रीकृष्ण-भक्तिके द्वारा उद्धवजीका सम्मान किया। अब वे भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा सुरक्षित मथुरापुरीमें लौट आये॥ ६८॥✎ 16781986
एवं सभाजितो गोपैः कृष्णभक्त्या नराधिप।
उद्धवः पुनरागच्छन्मथुरां कृष्णपालिताम्॥ ६८
प्रिय परीक्षित्! नन्दबाबा आदि गोपोंने इस प्रकार श्रीकृष्ण-भक्तिके द्वारा उद्धवजीका सम्मान किया। अब वे भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा सुरक्षित मथुरापुरीमें लौट आये॥ ६८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.47.68 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 434) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/47/68/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)