श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.48.14

दशम स्कन्ध · अध्याय 48 · अथाष्टचत्वारिंशोऽध्यायः

ननाम कृष्णं रामं च स तैरप्यभिवादितः।

पूजयामास विधिवत् कृतासनपरिग्रहान्॥ १४

nanāma kṛṣṇaṃ rāmaṃ ca sa tairapyabhivāditaḥ|

pūjayāmāsa vidhivat kṛtāsanaparigrahān|| 14

अर्थ

अक्रूरजीने भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजीको नमस्कार किया तथा उद्धवजीके साथ उन दोनों भाइयोंने भी उन्हें नमस्कार किया। जब सब लोग आरामसे आसनोंपर बैठ गये, तब अक्रूरजी उन लोगोंकी विधिवत् पूजा करने लगे॥ १४॥✎ 1680

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1680 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: भर-कर → भरकर

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें