श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.48.9

दशम स्कन्ध · अध्याय 48 · अथाष्टचत्वारिंशोऽध्यायः

आहोष्यतामिह प्रेष्ठ दिनानि कतिचिन्मया।

रमस्व नोत्सहे त्यक्तुं संगं तेऽम्बुरुहेक्षण॥ ९

āhoṣyatāmiha preṣṭha dināni katicinmayā|

ramasva notsahe tyaktuṃ saṃgaṃ te'mburuhekṣaṇa|| 9

अर्थ

‘प्रियतम! आप कुछ दिन यहीं रहकर मेरे साथ क्रीडा कीजिये। क्योंकि हे कमलनयन! मुझसे आपका साथ नहीं छोड़ा जाता’॥ ९॥✎ 1679

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1679 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: श्याम-सुन्दर → श्यामसुन्दर

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