अक्रूरजीने कहा—महाराज धृतराष्ट्रजी! आप कुरुवंशियोंकी उज्ज्वल कीर्तिको और भी बढ़ाइये। आपको यह काम विशेषरूपसे इसलिये भी करना चाहिये कि अपने भाई पाण्डुके परलोक सिधार जानेपर अब आप राज्यसिंहासनके अधिकारी हुए हैं॥ १७॥
भो भो वैचित्रवीर्य त्वं कुरूणां कीर्तिवर्धन।
भ्रातर्युपरते पाण्डावधुनाऽऽसनमास्थितः॥ १७
अक्रूरजीने कहा—महाराज धृतराष्ट्रजी! आप कुरुवंशियोंकी उज्ज्वल कीर्तिको और भी बढ़ाइये। आपको यह काम विशेषरूपसे इसलिये भी करना चाहिये कि अपने भाई पाण्डुके परलोक सिधार जानेपर अब आप राज्यसिंहासनके अधिकारी हुए हैं॥ १७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.49.17 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 442) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/49/17/