आप धर्मसे पृथ्वीका पालन कीजिये। अपने सद्व्यवहारसे प्रजाको प्रसन्न रखिये और अपने स्वजनोंके साथ समान बर्ताव कीजिये। ऐसा करनेसे ही आपको लोकमें यश और परलोकमें सद्गति प्राप्त होगी॥ १८॥
धर्मेण पालयन्नुर्वीं प्रजाः शीलेन रंजयन्।
वर्तमानः समः स्वेषु श्रेयः कीर्तिमवाप्स्यसि॥ १८
आप धर्मसे पृथ्वीका पालन कीजिये। अपने सद्व्यवहारसे प्रजाको प्रसन्न रखिये और अपने स्वजनोंके साथ समान बर्ताव कीजिये। ऐसा करनेसे ही आपको लोकमें यश और परलोकमें सद्गति प्राप्त होगी॥ १८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.49.18 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 442) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/49/18/