श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.5.29

दशम स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

नन्द उवाच

अहो ते देवकीपुत्राः कंसेन बहवो हताः।

एकावशिष्टावरजा कन्या सापि दिवं गता॥ २९

aho te devakīputrāḥ kaṃsena bahavo hatāḥ|

ekāvaśiṣṭāvarajā kanyā sāpi divaṃ gatā|| 29

अर्थ

नन्दबाबाने कहा—भाई वसुदेव! कंसने देवकीके गर्भसे उत्पन्‍न तुम्हारे कई पुत्र मार डाले। अन्तमें एक सबसे छोटी कन्या बच रही थी, वह भी स्वर्ग सिधार गयी॥ २९॥

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