जहाँ-तहाँ रुक्मिणी-हरणकी ही गाथा गायी जाने लगी। उसे सुनकर राजा और राजकन्याएँ अत्यन्त विस्मित हो गयीं॥ ५९॥✎ 8921689
रुक्मिण्या हरणं श्रुत्वा गीयमानं ततस्ततः।
राजानो राजकन्याश्च बभूवुर्भृशविस्मिताः॥ ५९
जहाँ-तहाँ रुक्मिणी-हरणकी ही गाथा गायी जाने लगी। उसे सुनकर राजा और राजकन्याएँ अत्यन्त विस्मित हो गयीं॥ ५९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.54.59 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 481) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/54/59/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)