श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.58.28

दशम स्कन्ध · अध्याय 58 · अथाष्टपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

स तेन समनुज्ञातः सुहृद्भिश्‍चानुमोदितः।

आययौ द्वारकां भूयः सात्यकिप्रमुखैर्वृतः॥ २८

sa tena samanujñātaḥ suhṛdbhiścānumoditaḥ|

āyayau dvārakāṃ bhūyaḥ sātyakipramukhairvṛtaḥ|| 28

अर्थ

कुछ दिनोंके बाद भगवान् श्रीकृष्ण अर्जुनकी अनुमति एवं अन्य सम्बन्धियोंका अनुमोदन प्राप्त करके सात्यकि आदिके साथ द्वारका लौट आये॥ २८॥ वहाँ आकर उन्होंने विवाहके योग्य ऋतु और ज्यौतिष-शास्त्रके अनुसार प्रशंसित पवित्र ल‌ग्‍नमें कालिन्दीजीका पाणिग्रहण किया। इससे उनके स्वजन-सम्बन्धियोंको परम मंगल और परमानन्दकी प्राप्ति हुई॥ २९॥

यह व्याख्या श्लोक 10.58.28 से 10.58.29 तककी एक साथ है।

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