इसके बाद गोपियोंने आचमन करके ‘अज’ आदि ग्यारह बीज-मन्त्रोंसे अपने शरीरोंमें अलग-अलग अंगन्यास एवं करन्यास किया और फिर बालकके अंगोंमें बीजन्यास किया॥ २१॥
गोप्यः संस्पृष्टसलिला अंगेषु करयोः पृथक्।
न्यस्यात्मन्यथ बालस्य बीजन्यासमकुर्वत॥ २१
इसके बाद गोपियोंने आचमन करके ‘अज’ आदि ग्यारह बीज-मन्त्रोंसे अपने शरीरोंमें अलग-अलग अंगन्यास एवं करन्यास किया और फिर बालकके अंगोंमें बीजन्यास किया॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.6.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 159) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/6/21/