चलते समय भगवान् वैकुण्ठ और बैठते समय भगवान् श्रीपति तेरी रक्षा करें। भोजनके समय समस्त ग्रहोंको भयभीत करनेवाले यज्ञभोक्ता भगवान् तेरी रक्षा करें॥ २६॥
व्रजन्तमव्याद् वैकुण्ठ आसीनं त्वां श्रियः पतिः।
भुंजानं यज्ञभुक् पातु सर्वग्रहभयंकरः॥ २६
चलते समय भगवान् वैकुण्ठ और बैठते समय भगवान् श्रीपति तेरी रक्षा करें। भोजनके समय समस्त ग्रहोंको भयभीत करनेवाले यज्ञभोक्ता भगवान् तेरी रक्षा करें॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.6.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 159) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/6/26/