पूतना एक राक्षसी थी। लोगोंके बच्चोंको मार डालना और उनका खून पी जाना—यही उसका काम था। भगवान्को भी उसने मार डालनेकी इच्छासे ही स्तन पिलाया था । फिर भी उसे वह परमगति मिली, जो सत्पुरुषोंको मिलती है॥ ३५॥✎ 2060
पूतना लोकबालघ्नी राक्षसी रुधिराशना।
जिघांसयापि हरये स्तनं दत्त्वाऽऽप सद्गतिम्॥ ३५
पूतना एक राक्षसी थी। लोगोंके बच्चोंको मार डालना और उनका खून पी जाना—यही उसका काम था। भगवान्को भी उसने मार डालनेकी इच्छासे ही स्तन पिलाया था । फिर भी उसे वह परमगति मिली, जो सत्पुरुषोंको मिलती है॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.6.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 160) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/6/35/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)