॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.6.34
दह्यमानस्य देहस्य धूमश्चागुरुसौरभः।
उत्थितः कृष्णनिर्भुक्तसपद्याहतपाप्मनः॥ ३४
dahyamānasya dehasya dhūmaścāgurusaurabhaḥ|
utthitaḥ kṛṣṇanirbhuktasapadyāhatapāpmanaḥ|| 34
अर्थ
जब उसका शरीर जलने लगा, तब उसमेंसे ऐसा धूँआ निकला, जिसमेंसे अगरकी-सी सुगन्ध आ रही थी। क्यों न हो, भगवान्ने जो उसका दूध पी लिया था—जिससे उसके सारे पाप तत्काल ही नष्ट हो गये थे॥ ३४॥✎ 2060