भगवान्के चरणकमल सबके वन्दनीय ब्रह्मा, शंकर आदि देवताओंके द्वारा भी वन्दित हैं। वे भक्तोंके हृदयकी पूँजी हैं। उन्हीं चरणोंसे भगवान्ने पूतनाका शरीर दबाकर उसका स्तनपान किया था॥ ३७॥
पद्भ्यां भक्तहृदिस्थाभ्यां वन्द्याभ्यां लोकवन्दितैः।
अंगं यस्याः समाक्रम्य भगवानपिबत् स्तनम्॥ ३७
भगवान्के चरणकमल सबके वन्दनीय ब्रह्मा, शंकर आदि देवताओंके द्वारा भी वन्दित हैं। वे भक्तोंके हृदयकी पूँजी हैं। उन्हीं चरणोंसे भगवान्ने पूतनाका शरीर दबाकर उसका स्तनपान किया था॥ ३७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.6.37 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 161) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/6/37/