श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.62.12

दशम स्कन्ध · अध्याय 62 · अथ द्विषष्टितमोऽध्यायः

तस्योषा नाम दुहिता स्वप्ने प्राद्युम्‍निना रतिम्।

कन्यालभत कान्तेन प्रागदृष्टश्रुतेन सा॥ १२

tasyoṣā nāma duhitā svapne prādyumninā ratim|

kanyālabhata kāntena prāgadṛṣṭaśrutena sā|| 12

अर्थ

परीक्षित्! बाणासुरकी एक कन्या थी, उसका नाम था ऊषा। अभी वह कुमारी ही थी कि एक दिन स्वप्नमें उसने देखा कि ‘परम सुन्दर अनिरुद्धजीके साथ मेरा समागम हो रहा है।’ आश्‍चर्यकी बात तो यह थी कि उसने अनिरुद्धजीको न तो कभी देखा था और न सुना ही था॥ १२॥

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