‘लोकाभिराम बलरामजी! महाबाहो! मैं आपका पराक्रम भूल गयी थी। जगत्पते! अब मैं जान गयी कि आपके अंशमात्र शेषजी इस सारे जगत्को धारण करते हैं॥ २६॥
राम राम महाबाहो न जाने तव विक्रमम्।
यस्यैकांशेन विधृता जगती जगतः पते॥ २६
‘लोकाभिराम बलरामजी! महाबाहो! मैं आपका पराक्रम भूल गयी थी। जगत्पते! अब मैं जान गयी कि आपके अंशमात्र शेषजी इस सारे जगत्को धारण करते हैं॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.65.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 545) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/65/26/