शरणागतवत्सल भगवान्ने देखा कि हमारे स्वजन भयभीत हो गये हैं और पुकार-पुकारकर विकलताभरे स्वरसे हमारी प्रार्थना कर रहे हैं; तब उन्होंने हँसकर कहा—‘डरो मत, मैं तुमलोगोंकी रक्षा करूँगा’॥ ३७॥✎ 8931953
श्रुत्वा तज्जनवैक्लव्यं दृष्ट्वा स्वानां च साध्वसम्।
शरण्यः सम्प्रहस्याह मा भैष्टेत्यवितास्म्यहम्॥ ३७
शरणागतवत्सल भगवान्ने देखा कि हमारे स्वजन भयभीत हो गये हैं और पुकार-पुकारकर विकलताभरे स्वरसे हमारी प्रार्थना कर रहे हैं; तब उन्होंने हँसकर कहा—‘डरो मत, मैं तुमलोगोंकी रक्षा करूँगा’॥ ३७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.66.37 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 549) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/66/37/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)