यह सोचकर नन्दबाबाने बालकको गोदमें उठा लिया और ब्राह्मणोंसे साम, ऋक् और यजुर्वेदके मन्त्रोंद्वारा संस्कृत एवं पवित्र ओषधियोंसे युक्त जलसे अभिषेक कराया॥ १४॥
इति बालकमादाय सामर्ग्यजुरुपाकृतैः।
जलैः पवित्रौषधिभिरभिषिच्य द्विजोत्तमैः॥ १४
यह सोचकर नन्दबाबाने बालकको गोदमें उठा लिया और ब्राह्मणोंसे साम, ऋक् और यजुर्वेदके मन्त्रोंद्वारा संस्कृत एवं पवित्र ओषधियोंसे युक्त जलसे अभिषेक कराया॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.7.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 164) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/7/14/