श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.7.15

दशम स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

वाचयित्वा स्वस्त्ययनं नन्दगोपः समाहितः।

हुत्वा चाग्‍निं द्विजातिभ्यः प्रादादन्‍नं महागुणम्॥ १५

vācayitvā svastyayanaṃ nandagopaḥ samāhitaḥ|

hutvā cāgniṃ dvijātibhyaḥ prādādannaṃ mahāguṇam|| 15

अर्थ

उन्होंने बड़ी एकाग्रतासे स्वस्त्ययनपाठ और हवन कराकर ब्राह्मणोंको अति उत्तम अन्‍नका भोजन कराया॥ १५॥

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