इसके बाद नन्दबाबाने अपने पुत्रकी उन्नति और अभिवृद्धिकी कामनासे ब्राह्मणोंको सर्वगुणसम्पन्न बहुत-सी गौएँ दीं। वे गौएँ वस्त्र, पुष्पमाला और सोनेके हारोंसे सजी हुई थीं। ब्राह्मणोंने उन्हें आशीर्वाद दिया॥ १६॥
गावः सर्वगुणोपेता वासःस्रग्रुक्ममालिनीः।
आत्मजाभ्युदयार्थाय प्रादात्ते चान्वयुंजत॥ १६
इसके बाद नन्दबाबाने अपने पुत्रकी उन्नति और अभिवृद्धिकी कामनासे ब्राह्मणोंको सर्वगुणसम्पन्न बहुत-सी गौएँ दीं। वे गौएँ वस्त्र, पुष्पमाला और सोनेके हारोंसे सजी हुई थीं। ब्राह्मणोंने उन्हें आशीर्वाद दिया॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.7.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 164) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/7/16/