भगवान् श्रीकृष्णने मनुष्य-लोकमें प्रकट होकर मनुष्य-जातिके स्वभावका अनुसरण करते हुए जो बाललीलाएँ की हैं अवश्य ही वे अत्यन्त अद्भुत हैं, इसलिये आप अब उनकी दूसरी बाल-लीलाओंका भी वर्णन कीजिये॥ ३॥✎ 883
अथान्यदपि कृष्णस्य तोकाचरितमद्भुतम्।
मानुषं लोकमासाद्य तज्जातिमनुरुन्धतः॥ ३
भगवान् श्रीकृष्णने मनुष्य-लोकमें प्रकट होकर मनुष्य-जातिके स्वभावका अनुसरण करते हुए जो बाललीलाएँ की हैं अवश्य ही वे अत्यन्त अद्भुत हैं, इसलिये आप अब उनकी दूसरी बाल-लीलाओंका भी वर्णन कीजिये॥ ३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.7.3 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 162) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/7/3/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#883 शब्दोंके बीचका स्थान: सर्वशक्तिमान्भगवान् → सर्वशक्तिमान् भगवान्