श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.72.24

दशम स्कन्ध · अध्याय 72 · अथ द्विसप्ततितमोऽध्यायः

बलेर्नु श्रूयते कीर्तिर्वितता दिक्ष्वकल्मषा।

ऐश्‍वर्याद् भ्रंशितस्यापि विप्रव्याजेन विष्णुना॥ २४

balernu śrūyate kīrtirvitatā dikṣvakalmaṣā|

aiśvaryād bhraṃśitasyāpi vipravyājena viṣṇunā|| 24

अर्थ

विष्णुभगवान्‌ने ब्राह्मणका वेष धारण करके बलिका धन, ऐश्‍वर्य—सब कुछ छीन लिया; फिर भी बलिकी पवित्र कीर्ति सब ओर फैली हुई है और आज भी लोग बड़े आदरसे उसका गान करते हैं॥ २४॥

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