kṛṣṇaṃ kratuṃ ca śaṃsantaḥ svadhāmāni yayurmudā|| 52
अर्थ
राजा युधिष्ठिरने देवता, मनुष्य और आकाशचारियोंका यथायोग्य सत्कार किया तथा वे भगवान् श्रीकृष्ण एवं राजसूय यज्ञकी प्रशंसा करते हुए बड़े आनन्दसे अपने-अपने लोकको चले गये॥ ५२॥
राज्ञा सभाजिताः सर्वे सुरमानवखेचराः।
कृष्णं क्रतुं च शंसन्तः स्वधामानि ययुर्मुदा॥ ५२
राजा युधिष्ठिरने देवता, मनुष्य और आकाशचारियोंका यथायोग्य सत्कार किया तथा वे भगवान् श्रीकृष्ण एवं राजसूय यज्ञकी प्रशंसा करते हुए बड़े आनन्दसे अपने-अपने लोकको चले गये॥ ५२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.74.52 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 597) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/74/52/