श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.8.19

दशम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

तस्मान्‍नन्दात्मजोऽयं ते नारायणसमो गुणैः।

श्रिया कीर्त्यानुभावेन गोपायस्व समाहितः॥ १९

tasmānnandātmajo'yaṃ te nārāyaṇasamo guṇaiḥ|

śriyā kīrtyānubhāvena gopāyasva samāhitaḥ|| 19

अर्थ

नन्दजी! चाहे जिस दृष्टिसे देखें—गुणमें, सम्पत्ति और सौन्दर्यमें, कीर्ति और प्रभावमें तुम्हारा यह बालक साक्षात् भगवान् नारायणके समान है। तुम बड़ी सावधानी और तत्परतासे इसकी रक्षा करो’॥ १९॥

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