श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.8.7

दशम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

गर्ग उवाच

यदूनामहमाचार्यः ख्यातश्‍च भुवि सर्वतः।

सुतं मया संस्कृतं ते मन्यते देवकीसुतम्॥ ७

yadūnāmahamācāryaḥ khyātaśca bhuvi sarvataḥ|

sutaṃ mayā saṃskṛtaṃ te manyate devakīsutam|| 7

अर्थ

गर्गाचार्यजीने कहा—नन्दजी! मैं सब जगह यदुवंशियोंके आचार्यके रूपमें प्रसिद्ध हूँ। यदि मैं तुम्हारे पुत्रके संस्कार करूँगा, तो लोग समझेंगे कि यह तो देवकीका पुत्र है॥ ७॥

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