ब्रह्मन्! जिस समय हमलोग गुरुकुलमें निवास कर रहे थे; उस समयकी वह बात आपको याद है क्या, जब हम दोनोंको एक दिन हमारी गुरुपत्नीने ईंधन लानेके लिये जंगलमें भेजा था॥ ३५॥
अपि नः स्मर्यते ब्रह्मन् वृत्तं निवसतां गुरौ।
गुरुदारैश्चोदितानामिन्धनानयने क्वचित्॥ ३५
ब्रह्मन्! जिस समय हमलोग गुरुकुलमें निवास कर रहे थे; उस समयकी वह बात आपको याद है क्या, जब हम दोनोंको एक दिन हमारी गुरुपत्नीने ईंधन लानेके लिये जंगलमें भेजा था॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.80.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 623) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/80/35/