श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.80.36

दशम स्कन्ध · अध्याय 80 · अथाशीतितमोऽध्यायः

प्रविष्टानां महारण्यमपर्तौ सुमहद् द्विज।

वातवर्षमभूत्तीव्रं निष्ठुराः स्तनयित्‍नवः॥ ३६

praviṣṭānāṃ mahāraṇyamapartau sumahad dvija|

vātavarṣamabhūttīvraṃ niṣṭhurāḥ stanayitnavaḥ|| 36

अर्थ

उस समय हमलोग एक घोर जंगलमें गये हुए थे और बिना ऋतुके ही बड़ा भयंकर आँधी-पानी आ गया था। आकाशमें बिजली कड़कने लगी थी॥ ३६॥

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