श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.84.71

दशम स्कन्ध · अध्याय 84 · अथ चतुरशीतितमोऽध्यायः

जनेभ्यः कथयांचक्रुर्यदुदेवमहोत्सवम्।

यदासीत्तीर्थयात्रायां सुहृत्सन्दर्शनादिकम्॥ ७१

janebhyaḥ kathayāṃcakruryadudevamahotsavam|

yadāsīttīrthayātrāyāṃ suhṛtsandarśanādikam|| 71

अर्थ

वहाँ जाकर उन्होंने सब लोगोंसे वसुदेवजीके यज्ञमहोत्सव, स्वजन-सम्बन्धियोंके दर्शन-मिलन आदि तीर्थयात्राके प्रसंगोंको कह सुनाया॥ ७१॥✎ 1718

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां दशमस्कन्धे उत्तरार्धे
तीर्थयात्रानुवर्णनं नाम चतुरशीतितमोऽध्यायः॥ ८४॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1718 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: मानने-वाले → माननेवाले

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