श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.85.30

दशम स्कन्ध · अध्याय 85 · अथ पञ्चाशीतितमोऽध्यायः

कालविध्वस्तसत्त्वानां राज्ञामुच्छास्त्रवर्तिनाम्।

भूमेर्भारायमाणानामवतीर्णौ किलाद्य मे॥ ३०

kālavidhvastasattvānāṃ rājñāmucchāstravartinām|

bhūmerbhārāyamāṇānāmavatīrṇau kilādya me|| 30

अर्थ

यह भी मुझे निश्‍चित रूपसे मालूम है कि जिन लोगोंने कालक्रमसे अपना धैर्य, संयम और सत्त्वगुण खो दिया है तथा शास्त्रकी आज्ञाओंका उल्लंघन करके जो स्वेच्छाचारपरायण हो रहे हैं, भूमिके भारभूत उन राजाओंका नाश करनेके लिये ही तुम दोनों मेरे गर्भसे अवतीर्ण हुए हो॥ ३०॥✎ 1910

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1910 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): निश्‍चत → निश्‍चित

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